कोमल भी है कठोर भी-नारी है श्रद्धा भी

Report : Arti Vaishnav

नारी तू नारायणी है,दया करुणा का सागर है।
दुर्गा,काली,चंडी,माँ लक्ष्मी का अवतार है ।।

“यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमन्ते तत्र देवता”

नारी बने सशक्त

Report: Arti Vaishnav

महिला सशक्तिकरण –

महिलाओं के सशक्तिकरण का आशय महिला शक्ति से है। नारियों को अपने जीवन का फैसला करने की स्वतंत्रता देना या उनमें ऐसी शक्तियां पैदा करना जिससे वे समाज में अपना सही स्थान स्थापित कर सकें।महिलाओ को आज बहुत अधिकार दिए गए है जो उन्हें सशक्त बनाने में बहुत ही सहायक भी हैं।लेकिन हम महिलाएं शक्ति सम्पन्न होकर भी जहां आरक्षण की मांग कर बैठते है वहां हमारी बड़ी बड़ी बातें स्वयं बेमानी लगने लगती हैं।क्योंकि हम बराबरी की बातें करती है समाज में पुरुषों के बराबर ही हमको भी अधिकार मिले ये कहती है वहाँ हमारी सारी बातें खोखली लगती है हम महिलाएं बराबरी और आरक्षण दोनों की मांग कर बैठती है जबकि हमको सामान्य होकर बिना किसी रिजर्वेशन के अपने हिम्मत,दम,और ताकत पर समाज मे देश मे अपनी पहचान स्थापित करनी होगी।


हम महिलाओ को समाज मे अपने प्रत्येक कार्य के पीछे निर्णायक क्षमता स्वयं की होनी चाहिए।हमे आत्मनिर्भर होना है अगर हम किसी गांव की सरपंच बन रही है तो उस सरपंची की डोर खुद के हांथो में होना चाहिए न कि हमारे पति के हांथो में होना चाहिए,हम पुलिस है तो हमारे सारे चैलेंज हमे स्वयं स्वीकार करने चाहिए न किसी भी पुरुष पर हमे निर्भर होना चाहिए अधिकतर महिलाएं केवल नाम की पदाधिकारी होती है जबकि उनके असल और निर्णायक डोर उनके पति या परिवार के अन्य पुरुष वर्ग के पास होती है महिला केवल दस्तखत करती है।इस चलन को हम सभी को बदलना ही होगा हम महिलाओ को निर्णायक बनना ही होगा।

‘महिला’ अपने आप में एक पूर्ण शब्द जो अपने भीतर बहुत कुछ छिपाये हुए है वो मां है वो बहन है वो पत्नी है बेटी है मित्र है समाज में मजबूती से अपना योगदान देती महिलायें सब कुछ बगैर कहे ही बयां कर जाती हैं।

‘अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस’ जो आज 8 मार्च को मनाया जाता है उस वक्त महिला सशक्तिकरण का जिक्र बड़ी ही प्रमुखता के साथ होने लगता है और कहा जाता है कि देश की तरक्की करनी है तो महिलाओं को सशक्त बनाना होगा। महिलाएं सशक्त कब बनेंगी जब वो सहारा लेना बंद कर खुद स्वावलम्बी बनेगी स्वयं निर्णय लेने की क्षमता रखेगी तब।महिलाओं के सशक्तिकरण का मतलब है कि महिलाओं को अपनी जिंदगी का फैसला करने की स्वतंत्रता होना उनमें ऐसी क्षमताएं पैदा करना ताकि वे समाज में अपना सही स्थान स्थापित कर सकें।
आज की महिलाएं अपने भविष्य को लेकर बहुत गंभीर हैं, हांलाकि, मानसिक, शारीरिक और यौन उत्पीड़न, महिला द्वेष और भेदभाव ज्यादातर महिलाओ के लिए जीवन का हिस्सा आज भी बनी हुई है ।हमारे कई अधिकार आज भी खोखले नजर आते है बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का अभियान हमारे देश मे चलाया जा रहा है जो सराहनीय है लेकिन फिर भी बेटियां आज भी हर रूप में प्रताड़ित और शोषित होती है।

क्यो और कैसे बहुत गम्भीर प्रश्न है ??

आप सभी को विश्व महिला दिवस की बधाई


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