Tedhi Baat टेढ़ी बात

नेता ज्ञान

GL Gaur उवाच

न कांग्रेस जीती है, न कांग्रेस ने हराया है।
नोटाधारी सवर्णों ने हराया है।
गौरक्षक गुण्डों ने हराया है।
अयोध्या के भगवान राम का क्रोध है यह ।
निराश्रित सड़कों पर डण्डे खाते गौवंश की हाय लगी है ।
कांवड़ियों के छालों पर पड़ी लाठियों का पुण्य फलीभूत हुआ है ।
देशद्रोही नारों पर चुप्पी का दण्ड है ।
जनता की गाढ़ी कमाई से विधायकों की खरीदफरोख्त कर चाणक्य की होड़ करने का परिणाम है यह ।
वाड्रा/सोनिया व अन्य कांग्रेसी नेताओं के घोटालों पर पर्दा डालने की सजा है यह ।
कश्मीरी पण्डितों के पुनर्वास को भूलने का परिणाम है यह ।
पाक विस्थापित हिन्दुओं को दर दर भटकाने का दण्ड है ।
भूख से बिलखती गौमाता का श्राप है ।
किराये के टट्टुओं से उत्पन्न देशद्रोही, जयचंद, स्वार्थी, मूर्ख जैसी गालियों से उपजी फसल है ।
370 का नाम लेकर 377, राममंदिर का नाम लेकर बोहरा मस्जिद, हिन्दू पीड़ा भूल कर तीन तलाक, मंदिर बनाने का नाम लेकर मंदिर तोड़ने, सवर्णों को लात मार कर संघ व बीजेपी को पानी पी पी कर कोसते रहने वालों की ओर भागने का परिणाम है यह ।
और सार समझना हो तो गोद वाले को छोड़ कर पेट वाले की आस में गोद वाले को भूलने का फल है जो प्रकृती का नियम है ।
प्रकृती का नियम अपना काम करता ही है, यह अटल है ।

 

अन्ना का अन्न शन्न

GL Gaur

एक पचासी साल का बूढा आदमी जब शहीद होने की गर्वोक्ति करता है तो इससे उसकी मानसिक अपरिपक्वता का पता चलता है। इससे उसके अहंकार का पता चलता है। इस देश में लाखों युवा हैं जो अपनी मातृ भूमि के लिए जान न्यौछावर कर सकते हैं। हर दिन देश की सेना के खूबसूरत नवयुवक अपनी जान न्यौछावर कर रहे हैं। अन्ना आप तो पचासी साल के हैं,पैर कब्र में लटक रहे हैं। कौनसी सांस वापिस आएगी कोई ठिकाना नहीं। शहीद होने की इतनी धमकी भी क्या?
अगर सच में ही अपनी जान देना चाहते हो तो छेड़ो एक आन्दोलन शराबबंदी के खिलाफ। बैठो कभी अनशन पर वेश्यावृति और मानव तस्करी के खिलाफ। उठाओ आवाज कभी बच्चों के अपहरण के खिलाफ। इस देश में हर वर्ष बीस हजार बच्चों का अपहरण होता है,जाहिर सी बात है उन्हें कोई लोरी सुनाने तो ले नही जाता होगा। दम है तो उठाओ अपनी आवाज कभी कश्मीरी विस्थापितों के लिए। तुम तो एक सैनिक रहे हो कभी अपनी आवाज बुलंद करते आतंकवाद और राजनीति के बीच पिसते सैनिकों के लिए। उठाओ कभी आवाज संगठित अपराध और माफियाओं के विरुद्ध।
लेकिन वहाँ तुम्हारी क्रान्ति की हवा निकल जायेगी। तुम्हें पता है वहां जान देने की,शहीद होने की बात कहनी ही नही पड़ेगी। वहां तुम्हारा तम्बू कब उखड़ेगा तुम्हें भी पता नही।
मित्रों यह देश नकली क्रांतिकारियों से भरा पड़ा है। एक को ढूंढने जाओ हजार मिलेंगे।
अन्ना आप जो कर रहे हैं वह क्रान्ति नही आपका अहंकार और महत्वाकांक्षा मात्र है। इतिहास के पन्नों पर अमर हो जाने की महत्वाकांक्षा।

मोदी के विरोधी और देसी गद्दार

GL Gaur

आरक्षण समर्थक मोदी विरोध में अब सारी हदें पार कर रहे हैं। जिस तरह वह हिन्दू धर्म,संस्कृति और और राष्ट्रीय गौरव को नुकसान पहुंचा रहे हैं वह अक्षम्य है। यह लोग मनुस्मृति से आगे बढ़ कर भगवान राम एवं सीता,हनुमान,माँ दुर्गा और अन्य देवी देवताओं का जिस तरह अपमान कर रहे हैं वह कदापि सहनीय नही हो सकता। यह लोग अब कश्मीर की आजादी और पाकिस्तान जिंदाबाद तक का नारा लगा रहे हैं। इससे बड़ा देशद्रोह और क्या हो सकता है।
चलो मनुस्मृति से इन्हें कुछ समस्या हो सकती है लेकिन भगवान राम से इन्हें क्या प्रोब्लम है। मां दुर्गा के अपमान से इनके कौनसे हित पूरे हो रहे हैं। कश्मीर की आजादी में इनको कौनसा अतिरिक्त आरक्षण मिल रहा है।
मुझे लगता है अब सरकारों को इस ओछी राजनीति से बाज आना चाहिए। सरकारों और राजनैतिक दलों को अब साहस का परिचय देना चाहिए। यदि इन देशविरोधी गतिविधियों पर समय रहते लगाम नही लगाई गयी तो देखना इसके बहुत बड़े दुष्परिणाम घटित होंगे। फिर शायद ही स्थिति नियंत्रण में हो सकेगी।
पूरे देश को इस गम्भीर स्थिति की तरफ ध्यान देना होगा। कहीं ऐसा न हो एक राष्ट्र के रूप में हमारी एकता और सार्वभौमिकता ही खतरे में पड़ जाए।
मित्रों संभालो इसे। खतरा बड़ा जान पड़ता है हमें।

घाव पिछवाड़े हो और सिकाई कपाल की कर रहे हो तो आराम कभी नही मिलेगा

GL Gaur

मनु स्मृति को जलाते हो क्यों कि मनु महाराज ने पूरे समाज को चार वर्णों में विभाजित कर दिया था।
लेकिन उस संविधान को कब जला रहे हो जिसने पूरे समाज को 7000 से भी ज्यादा जातियों और उपजातियों में विभक्त कर दिया। उस संविधान को आग क्यों नहीं लगा देते जिसने इस देश की नस नस में जातिवाद का जहर घोल दिया। जिसने दलितों को भी कई पालों में बाँट दिया। दलित,महादलित,पिछड़ा,महापिछड़ा,अति पिछड़ा। मीणा और मीना को भी दो पालों में बाँट दिया। उस संविधान को आग लगाओ जिसने पूरे भारतवर्ष को खंड खंड कर दिया।
देश की जनगणना तक जाति के आधार पर होती है। उस संविधान को आग कब लगा रहे हो तुम महान क्रांतिकारियों।
मनु महाराज ने तो मात्र चार वर्णों की व्यवस्था की थी और उसमें भी वर्ण व्यवस्था का आधार जन्म नहीं कर्म था। इस देश के संविधान और नेताओं ने तो इस देश को इतनी जातियों और उपजातियों में बाँट दिया जितनी प्रजाति इस देश में घास फूस,वनस्पति और कीड़े मकोडों की भी नहीं होगी,साढ़े सात हजार जातियाँ।
क्या आज का संविधान,देश का क़ानून जाति बदलने की अनुमति देगा? मैं जन्म से ब्राह्मण हूँ। क्या संविधान मुझे हरिजन बनने की अनुमति देगा?क्या इस देश का संविधान मुझे हरिजन बनने के बाद वह तमाम सुविधायें,छूट,आरक्षण और लोकसभा विधानसभा की सुरक्षित सीट देगा?
कौन फैला रहा है जातिवाद जरा अपनी बुद्धि का उपयोग करके देखो। आप सोचते हैं इस देश का कानून और विधान आपको जातिवाद के दुष्चक्र से निकलने देगा? अगर कोई ऐसा सोच रहा है तो वह निरा बुद्धू है। मुझे ऐसा करके दिखाओ।
असली अपराधी मनु महाराज नहीं अम्बेडकर और गांधी महाराज हैं। असली अपराधी इस देश के राजनेता हैं, जो जनता को मूर्ख बनाकर बीच बाजार उसका मुंडन कर रहे हैं।
मित्रों घाव पिछवाड़े हो और सिकाई कपाल की कर रहे हो तो आराम कभी नही मिलेगा। असली अपराधियों को पकड़ो। मनु महाराज को गाली देकर आसमान में मत थूको। वह थूक अपने ही ऊपर गिरने वाला है।

बीस करोड़ी बडेरा,करोड़पति गड़रिया लालू और गरीब ब्राह्मण

GL Gaur

एक बार एक गरीब ब्राह्मण था।
आप देखते हो हमारी लगभग सभी प्राचीन कहानियों की शुरुआत इसी अमर वाक्य से होती है। चाहे भागवत कथा हो या संतोषी माता की कथा,यह गरीब ब्राह्मण सब जगह मिल जाएगा। इतिहास में आज तक ऐसा नहीं हुआ कि ब्राह्मण के पास बड़ी हवेली थी। कभी ऐसा नही पाया गया कि ब्राह्मण के पास कोई जागीर थी। पूरे इतिहास में ब्राह्मण जीर्णशीर्ण पाया गया है और कुछ अतिरिक्त बुद्धिजीवी कहते हैं ब्राह्मणों ने इस देश को बहुत लूटा है। सोच रहा हूँ आखिर वो लूट का सामान किधर चला गया। न ब्राह्मण के पास जमीन है और न कोई अन्य संसाधन। ब्राह्मण के पास अगर कुछ था तो उसकी विद्या और बुद्धि। ब्राह्मण के पास एकमात्र संसाधन उसकी बुद्धि ही थी। जिस पर भी इस देश में ताला लगा दिया। निश्चित ही बुद्धि एक मनुष्य की बहुत बड़ी शक्ति होती है। लेकिन इस देश ने पूरी व्यवस्था की कि ब्राह्मण हाशिये पर आ जाए। उसकी सब राहें रोक दी गयी। तमाम आर्थिक और राजनैतिक अवसरों से उसे वंचित कर दिया गया। इस देश की राजनीति ने वह सब उपाय किये जिससे ब्राह्मण अपनी बुद्धि का कोई प्रदर्शन ही नहीं कर सके। पूरी दुनिया में भारत ही एक ऐसा देश बना जिसने समानता और सामाजिक न्याय के नाम पर अपने सर्वश्रेष्ठ नागरिकों को पीछे धकेला। अपनी श्रेष्ठ प्रतिभा को नकारा और निम्न एवं तृतीय श्रेणी प्रतिभा को आगे किया। यह सरासर नकारात्मक बात थी। यह कोई सामाजिक न्याय नहीं हो सकता। आप किसी को गिरा कर,किसी के पैर बाँध कर दूसरे को आगे कर रहे हैं। यह निहायत ही मूर्खता और अव्वल दर्जे की चूतियागिरी थी।
मित्रों निश्चित ही ब्राह्मण प्राचीन काल में सत्ता के केंद्र में था लेकिन फिर भी उसके एक हाथ में सदैव कमंडल था। भले ही सत्ता की चाबी ब्राह्मणों के पास थी लेकिन दूसरे हाथ में उसके पास एक तुम्बी थी। तुम्बी वह लकड़ी या एक घिया जैसे फल का बाहरी खोल जिसमें वह भिक्षाटन करता था।
मित्रों पूरे इतिहास में मुझे एक भी ऐसा पात्र नहीं मिला जिसके एक हाथ में राजसिंहासनों की चाबी हो और दूसरे में भिक्षापात्र। ऐसा अद्भुत चरित्र ब्राह्मण का ही था। इतना त्यागमय,इतना निस्पृश्य,इतना अद्भुत चरित्र ब्राह्मण का रहा है। और कुछ प्रगतिशील कहते हैं ब्राह्मण ने इस देश को बहुत लूटा है। मित्रों यह कोई क्रांतिकारी स्रान्तिकारी नहीं हैं। यह महादुष्ट और लुटेरे लोग हैं। आप देखते हो भारत में कौन लूट रहा है। आज लालू यादव की लड़की के फार्म हाउस को सीज किया गया है। लालू यादव जैसे गड़रिये के पास 5 हजार करोड़ रूपये की सम्पत्ति है। सोनिया गाँधी और राबर्ट वढेरा के पास बीस हजार करोड़ रूपये की सम्पत्ति है। भारत के यह झोलाझाप लोग जिन्हें लोग बुद्धिजीवी कहते हैं सब करोड़ो अरबों में खेल रहे हैं।
और कह रहो हो ब्राह्मण लूट रहा है। सच बात तो यह है कि इस देश में बन्दर बाँट चल रही है और गरीब ब्राह्मण टुकुर टुकुर देख रहा है।
“तुमने इस देश को लूटा है” ब्राह्मण को यह पटी इतनी बार पढाई गयी है कि उसने इसे सच मान लिया है। उसे लगने लगा है कि उसने सचमुच इस देश को लूटा होगा। उसके पूर्वजों ने इस देश को लूटा होगा।
मित्रों हमारे पूर्वजों ने तो इस देश के लिए अपना सर्वस्व लुटाया है लूटा कुछ भी नहीं है। हमारे पूर्वजों ने तो इस देश के लिए अपनी हड्डियां तक दान में दे दी थी और तुम कहते हो उन्होंने इस देश को लूटा है। हमारे पूर्वज तो एक मुट्ठी अनाज पर अपना जीवनयापन करते थे और यह क्रांतिकारी कहता है ब्राह्मणों ने इस देश को बहुत लूटा है।
मित्रों पोंछ डालो इस तरह की षड्यंत्रपूर्ण बातों को अपने दिमाग से। मत आना किसी के बहकावे में। हमने इस देश को संवारा हैं,लूटा नही है। हमने इस देश को सभ्य बनाया है। हमने तो इस देश को लुटेरों से बचाया है। लूटा तो अब जा रहा है इस देश को। किसी क्रांतिकारी की गाँव में जोर हो तो रोके इन लूटेरों को। असल बात तो यह है कि यह कथित क्रांतिकारी खुद लूट में शामिल है। यह खुद इस लूट का हिस्सेदार है। जय परशुराम ! जय हिंद!

मोदी महिमा मुंडन

GL Gaur

प्रधानमंत्री जी,आप जिस पद पर हैं उस पद की जवाबदेही है इस देश की जनता के प्रति।अब जबकि RBI ने साफ़ कर दिया कि नोटबन्दी में बैन 99% करंसी वापस आ गई है,ये आपकी ज़िम्मेदारी है कि आप जनता के बीच आकर या तो नोटबन्दी को गलत फैसला मानें या उससे हुए लाभ गिनाएं।
यह रिजर्व बैंक का अधिकृत स्टेटमेंट है। 99 प्रतिशत करंसी का वापिस आना। तकनीकी रूप से भले ही यह 99 प्रतिशत ही हो। आप कह सकते हैं कि कम से कम 1 प्रतिशत ब्लैक मनी तो इनवैलिड हुई।
नहीं सच्चाई बिल्कुल अलग और भयावह है। जिसे सुनकर आपका मुंह खुला का खुला रह जाएगा।
उदाहरण द्वारा समझें। मान लो रिजर्व बैंक 500 रूपये के दस हजार नोट जारी करता है। पांच साल दस साल तक चलन में रहते रहते उनमें से कितने नोट कट फट जाते होंगे। कितने नोट पानी में भीग कर,आगजनी में नष्ट हो जाते होंगे। कितने नोटों पर लोग कुछ लिख देते हैं वह चलन से बाहर हो जाते हैं। कितने नोटों का लोग अलग अलग उपयोग कर लेते होंगे। जैसे सजावट के लिए उन्हें काट कर फूल पत्ती,फूल दान वगैरह में। कितने नोटों को कुछ ड्रग स्मोकर नोटों में ड्रग्स डाल कर फूंक देते हैं। कितने नोट जो लोग बदला ही नही पाए। जैसे मेरे पास दो नोट रह गये। लोग भिन्न भिन्न कारणों से नही बदला सके। उनकी भी गणना कर लें। कहने का तात्पर्य यह है कि अपने लम्बे चलन काल में कम से कम 10 प्रतिशत नोट नष्ट हो जाते हैं। उनका बाजार में कोई अस्तित्व नही रहता। अगर हम देखें तो 90 प्रतिशत वैलिड मुद्रा ही अस्तित्व में रहती है बाजार में।
तो यह 99 प्रतिशत वापिस कैसे pay in हो गया। यह 99 प्रतिशत कैसे सबमिशन हो गया। ज्यादा गहराई से सोचने की कोई आवश्यता नही है। यह 9 प्रतिशत फेक मुद्रा रिजर्व बैंक में जमा हो गयी है। 9 प्रतिशत नकली नोट रिजर्व बैंक में पहुँच गये हैं। यानि लगभग 20 अरब रूपये मूल्य के जाली नोट रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया में पहुँच गये हैं और बैंक को उनके बदले में असली मुद्रा या कहो वैलिड नोट चुकाने पड़े हैं।
यह रिजर्व बैंक को और तदुपरांत देश को सीधी सीधी चपत लग गयी है। नकली नोट रिजर्व बैंक द्वारा वैलिडेट कर दिए गये हैं। यह कैसी नोट बंदी? गये थे काला धन पकड़ने लौट के बुद्धू घर को आये। काला धन पकड़ने गये थे उलटे काले को ही सफेद बना आये।
मित्रों इसे मैं घोटाला तो नही कहूँगा लेकिन यह सरकार की अदूरदर्शिता, भारी भूल और आत्मघाती कदम था। जिसका भारी मूल्य देश की अर्थव्यवस्था और देश की जनता को चुकाना पड़ा है।
जय हिंद! जय भारत!

केरल,काली दाल और लम्बी दाढ़ी वाले शेख

GL Gaur

केरल के लिए संयुक्त अरब अमीरात ने 700 करोड़ रूपये सहायता की पेशकश की है। जिसका बड़े शोर शराबे से स्वागत किया जा रहा है।
यहां मेरे कुछ प्रश्न हैं कृपया मनन करें।
अभी हाल ही में गुजरात में भी भीषण बाढ़ आयी थी। क्या आप बता सकते हैं अमीरात से कितनी सहायता राशि आयी थी?इसी मानसून ने महाराष्ट्र और मुंबई में भी भीषण तबाही मचायी थी। संयुक्त अरब अमीरात से एक भी पैसा नही मिला। थोड़े समय पहले की बात करें तो महाराष्ट्र के लातूर और गुजरात में इस सदी का सबसे भयानक भूकम्प आया था। जहाँ केरल में चार सौ पांच आदमी मरे हैं वहीं लातूर में साठ हजार व्यक्ति काल के ग्रास बन गये थे। लातूर का पूरा इलाका मलबे के ढेर में तब्दील हो गया था। कोई बता सकता है उस त्रासदी में अरब अमीरात ने कितने करोड़ रूपये की आर्थिक मदद की थी। उत्तराखंड केदारनाथ में पहाड़ टूटने से तीस हजार व्यक्ति काल के गाल में समा गये थे। कोई बता सकता है संयुक्त अरब से कितना पैसा सहायता के रूप में आया था। इस मानसून की बाढ़ से केवल केरल ही अकेला पीड़ित राज्य नही है। कर्नाटक,उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश भी इस त्रासदी से जूझ रहे हैं। मध्यप्रदेश में अकेले शिवराज सिंह चौहान दिन रात भाग दौड़ कर रहे हैं। क्या कोई बतायेगा कि संयुक्त अरब अमीरात ने इन राज्यों के लिए कितनी सहायता राशि भेजी है।
अवश्य ही दाल में कुछ काला है। मुझे तो लगता है यह पूरी दाल ही काली है।
भारत सरकार 500 करोड़ और अरब अमीरात 700 करोड़।
मुझे विश्वास है मेरे मित्र इस विशेष रिश्ते को खूब पहचान गये होंगे। केरल,काली दाल और लम्बी दाढ़ी वाले शेख।
मेरी राय में भारत सरकार को यह सहायता पेशकश स्वीकार नही करनी चाहिए। इससे देश के इस भूभाग में गलत सन्देश जाएगा। संयुक्त अरब अमीरात इस एक तीर से दो निशाने लगा रहा है। जिसे समझना बेहद जरूरी है।


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