टिड्डिया और मीडिया

एक पुरानी प्रसिद्ध कहानी :-

एक चीटी एक टिड्डे की कहानी विश्वस्तरीय लोकप्रिय कहानियों मे से एक है।

चीटीं बहुत मेहनती थी, वह हमेशा अपने काम मे लगी रहती थी, जब कि टिड्डा दिन भर मस्ती करता रहता था। चीटी अक्सर उसे समझाती की हमेशा मौज मस्ती मे डुबे रहना अच्छा नही है। कुछ ही दिनों के बाद सर्दियों का मौसम आने वाला था। चीटी अथक मेहनत कर सर्दियों के आने से पहले एक घर बना लेना चाह रही थी और पर्याप्त भोजन जमा कर रख लेना चाह रही थी,
इसके विपरीत टिड्डा आने वाली सर्दी के मौसम से बेखबर दिन भर मौज मस्ती मे लगा रहा।

कुछ दिनों के बाद सर्दी आ गयी , चीटीं अपने घर मे निश्चिंत आराम कर रही थी पर टिड्डा बाहर जाड़े मे ठिठुरते हुए भुख से व्याकुल होकर मर गया।

इसी कहानी को हम आज के भारतीय परिपेक्ष मे देखें:-

सर्दी के मौसम आते ही टिड्डा ठंड से कांप रहा था। उसे एक आईडिया सुझा , उसने एक प्रेस कांफ्रेंस बुलाई और अपने आपको ठंड से ठिठुरते और चींटी को अपने घर में चैन से आराम करते हुए और उसके भोजन सामाग्री से भरे डाईनिंग टेबुल को दिखाया।

BBG, CNM, MDTV, RAJTAK चैनेल वालों ने यह समाचार प्रमुखता से टिड्डे को ठंड से ठिठुरते और चींटी को अपने घर में चैन से आराम करते हुए और उसके भोजन सामाग्री से भरे डाईनिंग टेबुल को दिखाया।

विश्व नकारा संघ, विश्व अस्वस्थ संघ यह विचित्र विरोधाभाष देखकर दंग रह गये कि क्यों इस गरीब टिड्डे को इस भयंकर सर्दी में ठंड से ठिठुरते हुए छोड़ दिया गया।
घोघा चाटकर दौड़ी आई और अन्य टिड्डों के साथ आमरण अनसन पर बैठ गयी , “सदियों के मौसम मे टिड्डों को अपेक्षाकृत गर्म स्थान मे रहने और भोजन का उचित प्रबंध किया जाये”।

अधंती रोय चींटी के घर के सामने प्रदर्शन करने आई,

मोमवती ने टिड्डे को दलित मानते हुए इसे उनके साथ घोर अन्याय माना।

Arnesty International and विश्व संघ के अध्यक्ष Toffi Annand ने भारत सरकार से ,टिड्डे के मौलिक अधिकारों के हनन का मामला उठाया।

इन्टरनेट (INTERNET) के सोशल साईट्स टिड्डे के समर्थन मे भर गये और विश्व के अनेक देशों से सहानुभूति के साथ साथ मदद का आँफर आने लगा। लोग टिड्डे के प्रति इस अन्याय के लिए ईश्वर को दोष देने लगे।

विरोधी दल के नेता संसद का वहिष्कार किए, छी पी एम , छी पी गई आदि
झँटूवाम दलों ने भारत बंद का आह्वान कर दिया।

पश्चिम बंगाल और केरल में छी पी एम ने नया अध्यादेश लाया जिसमे चींटीं को गर्मी के दिनों मे अधिक परिश्रम करने पर रोक लगा दिया गया ताकि वे ज्यादा नहीं कमा सकें और चीटी और टिड्डे के बीच ज्यादा अन्तर न रह जाये।

चमचा बाबरची ने अधिकांश ट्रेनों में एक स्पेशल कोच ”टिड्डा रथ” के नाम से जोड़ दिया जिसमे टिड्डे को मामुली भाड़े पर भारत भ्रमण की सुविधा दी गयी।

अन्त मे सरकार द्वारा एक न्यायिक जाँच आयोग की स्थापना की गई जिसने एक नया एक्ट “Prevention of Terrorism against Tidda Act” POTATA की रुपरेखा बनाकर सरकार को दिया जिसे सर्दियों के मौसम के आने से पहले से ही लागु मान लिया गया।

शिक्षा संस्थाओं मे, माननीय मानव संसाधन मंत्री कुटिल सब्बल के द्वारा टिड्डों के लिए अतिरिक्त आरक्षण की अनुसंशा की गई ।

सरकार और विभिन्न राज्य सरकारों के द्वारा सरकारी नौकरियों में टिड्डों के लिए विशेष आरक्षण की व्य्वस्था किया गया।

सरकार के द्वारा मेहनती चीटी पर POTATA एक्ट के तह्त कई प्रकार का टैक्स लगा दिया गया, उसके घर को जब्त कर BAN D TV आदि मिडिया कर्मियों के सामने ,टिड्डों को दे दिया गया।
मैला चाटकर ने इसे “A Triumph of Justice’ कहा ।

ललुआ खासभ ने इसे सामाजिक न्याय कहा ।

छी पी एम, छी पी गई ने इसे दबे कुचलों की क्रान्तिकारी जीत बताया ।

मेहनती चीटीं हारकर अमेरिका चली गई , अमेरिकी सरकार ने चीटीयों की मेहनत से प्रभावित होकर उन्हें आसान शर्तों पर वीसा दे दिया, चीटीयाँ वहाँ स्थापित हुईं और सिलीकन वैली मे करोड़ों डालर की कम्पनियाँ बना ली।

और टिड्डा आज भी सरकारी सहायतों का मुँहताज बना हुआ है। सैकड़ों की संख्या मे टिड्डे आज भी मर रहें हैं। सरकारी विभाग आलसी टिड्डों से भर गये। बिना मेहनत किए उन्हें सब पाने की आदत हो गई है।

मेहनतकश चीटीयां अपनी मेहनत का इस तरह अपमान देखकर और हजारों प्रकार के सरकारी टैक्सों के द्वारा लुटने के भय से बड़े पैमाने पर दुसरे देश चली गईं या विभिन्न बड़े उद्योगपतियों के द्वारा उँची तनख्वाह पर उन्हें ले लिया गया।
और हमारा देश आज भी विकासशील बना हुआ है।


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