हवाई सेना के बाद अब जल सेना ने की पकिस्तान की हजामत

पिछले दिनों सर्जिकल स्ट्राइक के बाद देश की थल सेना ने पाकिस्तानी आतंकवादियों की जमकर हजामत बनाई थी। उसके बाद भी पाकिस्तानी मिट्टी से उपजे आतंकवादियों ने अपनी जिद नहीं छोड़ी। इसके बाद वो हुआ जिसका किसी को अंदाज़ा भी नहीं था। पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले में हमारे देश के 40 जवानों को अपने प्राणों की आहुति देनी पड़ी। इसने दुख के साथ पूरे देश को एक संकल्प दिलाया कि अब आतंकवाद को मिटाने के लिए आखिरी लड़ाई लड़ने की जरूरत है। इस लड़ाई की शुरुआत हमारे द्वारा पाकिस्तान के बालाकोट में एयर स्ट्राइक से हुई। इस एयर स्ट्राइक के बाद से लगातार खबरें आती रही थी कि कहीं 200 तो कहीं 400 आतंकवादी मारे गए हैं। हमारे देश के अंदर भले ही इन आतंकवादियों की संख्या को लेकर काफी बवाल हो रहा हो लेकिन देश की सेना के अदम्य साहस और शौर्य से कोई भी पार्टी इनकार नहीं कर रही।

थल सेना और वायु सेना के बाद अब बारी थी जल सेना की। हमारी यह वही जल सेना है जिसने 1971 की लड़ाई में एक अभूतपूर्व भागीदारी निभाई है। यदि हम 1971 में पाकिस्तान के दो टुकड़े कर पाए तो इसका एक बहुत बड़ा असर हमारी जल सेना ने हमारी लड़ाई में छोड़ा है। बालाकोट हमले के बाद से तीनों ही सेनाओं को हाई अलर्ट पर रख दिया गया था। ऐसा माना जा रहा था कि इस एक हमले के बाद से पाकिस्तान रीटेलिएट जरूर करेगा। वैसे उसके जीजा चीन सहित बहुत से लोगों को यह मालूम है कि पाकिस्तान इस समय युद्ध लड़ने की स्थिति में नहीं है। विश्व बिरादरी के सामने जिस प्रकार से पाकिस्तान की मिट्टी पलीत हुई है उसको तो पूरी दुनिया ने देखा ही है।

■ पुलवामा हमले के बाद बदली थी परिस्थितियां : 
पुलवामा आतंकी हमले के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच में तनाव काफी बढ़ गया था। सीमा पर हो रही गोलीबारी इसका रोज कोई ना कोई बड़ा उदाहरण दे रहे थे। इस दौरान भारतीय वायु सेना, भारतीय थल सेना और भारतीय जल सेना ने एक साझा अभ्यास किया था। यह बताने के लिए था कि भारत की सेना इस समय कुछ बड़ा करने जा रही है। वैसे भी अमेरिका जैसा देश पहले ही पाकिस्तान को चेतावनी का था कि भारत पाकिस्तान के ऊपर कोई बड़ी कार्यवाही करने जा रहा है। वायु सेना ने अपने पराक्रम का एक नमूना तो बालाकोट स्ट्राइक पर दिखाई दिया था। जहां पर पाकिस्तानी F16 जेट को मार गिराया गया था। वही वालाकोट के अंदर 1000 किलो के बम को गिराने के बाद वहां के सभी आतंकवादी ठिकानों को नष्ट कर दिया गया था। सीमा पर हो रहा तनाव पाकिस्तानी मीडिया चैनलों पर भी साफ तौर पर देखा जा रहा था जहां पर पाकिस्तानी मीडिया के पत्रकार अपने मिसाइलों और सेना की ताकत का प्रदर्शन दिखा रहे थे।

■ भारतीय नौसेना ने किया खुलासा : 
अब यह खुलासा किया गया है कि भारतीय नौसेना को भी देश के पश्चिमी तट पर पाकिस्तान की ओर से किसी भी आक्रमण के खिलाफ एक बड़ी कार्यवाही के निर्देश के साथ तैनात किया गया था। दरअसल रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी किए गए एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार जाएं तो पुलवामा हमले के बाद उत्तरी अरब सागर में संचालन के लिए भारतीय नौसेना ने अपनी तेजी के साथ तैनाती की थी। इस दौरान भारतीय नौसेना ट्रॉपिक्स 2019 (थिएटर लेवल लेवल रेडियस एंड ऑपरेशनल एंड ऑपरेशनल एक्सरसाइज) में पहले से ही भाग ले रही थी, जो भारतीय सेना, भारतीय वायु सेना और भारतीय नौसेना तथा तटरक्षक बल का एक अंतर सेवा सैन्य अभ्यास बताया जाता है। इसी अभ्यास के कारण भारतीय नौसेना के तकरीबन सभी संसाधन अरब सागर के अंदर मौजूद थे।

पुलवामा के हमले के बाद ट्रॉपिक्स 2019 की कवायद को विराम दे दिया गया था परंतु नौ सेना के अधिकारियों ने यह खुलासा किया है कि नौसेना की प्रमुख लड़ाकू इकाइयों को अभ्यास से परिचालन तैनाती मोड में तेजी से स्थानांतरित किया गया था। यह निर्णय भारत और पाकिस्तान की सीमा पर बढ़े हुए तनाव को देखते हुए लिया गया था।

■ यह हथियार किये गए थे तैनात : 
इसमें INS विक्रमादित्य के नेतृत्व में कैरियर बैटल ग्रुप, परमाणु पनडुब्बी और अन्य युद्धपोतों, पनडुब्बियों और भारतीय सशस्त्र बलों के विमानों के स्कोर शामिल थे। इनकी तैनाती पाकिस्तानी तट के करीब उत्तरी अरब सागर में की गई थी। अंदेशा यह जताया जा रहा था कि पाकिस्तान की तरफ से कोई अप्रिय घटना करने की पूरी तैयारी है अतः भारतीय नौसेना को अपनी सीमा की रक्षा करते हुए पूरी तरीके से अलर्ट रहने की आवश्यकता है क्योंकि बालाकोट हमले के बाद से दिल मिलाया पाकिस्तान जरूर कुछ ना कुछ ऐसी हरकत करेगा जिससे भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव और बढ़ जाए। इस दौरान भारतीय जल सेना के द्वारा 60 जहाज, भारतीय तटरक्षक बल के 12 जहाज और 60 विमान ट्रोपिक्स 2019 का हिस्सा बने हुए थे और यह बताया जा रहा है कि ट्रॉपिक्स 2019 की कवायद खत्म हो जाने के बाद भी इन सभी हथियारों को वहां से हटाया नहीं गया बल्कि जरूरी जगह पर तैनात कर दिया गया था।

■ पाकिस्तान हुआ मजबूर :

इन सभी तैनाती यों को देखते हुए पाकिस्तान को अपनी सीमा में रहने को मजबूर होना पड़ा। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि अपने जल सीमा सीमा के ऊपर पाकिस्तान उतना मजबूत नहीं है जितना भारत है। भारत के पास यही एक सबसे बड़ी ताकत समुद्री सीमा की रक्षा करने हेतु देखी जाती है। बिना चीन की सहायता से पाकिस्तान जल के रास्ते भारत पर किसी भी प्रकार का दबाव नहीं बना सकता। इन सभी तथ्यों को देखने के बाद से पाकिस्तान ने अपनी वही शातिराना टैक्टिक्स अपनाई। सूत्रों के हवाले से खबर है कि कई पाकिस्तानी जहाजों को भारतीय सीमा के आसपास मंडराते हुए देखा गया था। सूत्रों का यह भी कहना है कि इसकी जानकारी मिलने के बाद भारतीय जल सेना ने कार्यवाही करते हुए उनके जहाजों को घेर लिया तथा देश के मार्कोस इन जहाजों में जाकर पाकिस्तानी सैनिकों की अच्छी मरम्मत कर वापस आए हैं।

■ IRC विश्लेषण : 
एक हारे हुए देश के अलावा पाकिस्तान एक आतंकवादी देश भी है। जिसने भारत के ऊपर हमेशा ही गंदी नजर से देखा है। यद्यपि चार युद्ध हारने के बाद भी पाकिस्तान को यह समझ में नहीं आया है कि वह भारत को नहीं हरा सकता, लेकिन इस समय जिस नेतृत्व की क्षमता का सामना पाकिस्तान कर रहा है उसको देखने के बाद अब वह चीन के आगे ही हाथ फैला रहा है। कूटनीतिक, आर्थिक और सेना की दृष्टि से पाकिस्तान भारत से मीलो पीछे खड़ा है। उसके पास सिर्फ एक हथियार है और वह है धार्मिक उन्माद फैलाना। यही कारण है कि उसका बलूचिस्तान और सिंध प्रांत पूरी तरीके से उससे कटा हुआ नजर आ रहा है। वहां उठते हुए आंदोलन स्पष्ट रूप से पाकिस्तानी सेना से पाकिस्तानी सेना के साथ ही पाकिस्तानी हुक्मरानों के सर का दर्द बने हुए हैं। यह देखने वाली बात होगी कि आने वाले समय में इमरान खान की सरकार इस विषय पर क्या कदम उठाती है, लेकिन जिस प्रकार से 2019 के चुनाव भारत में पास आते जा रहे हैं पाकिस्तान के अंदर भी हलचल बढ़ती जा रही है।

यदि आपको याद हो तो 2014 में नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद सबसे ज्यादा शोर देश के विपक्ष के बाद पाकिस्तान में ही मचा था। यह कहा गया था कि 2002 का कातिल अब भारत का प्रधानमंत्री बनने वाला है। वही हमारे देश के कुछ तथाकथित मीडिया चैनलों ने भी पाकिस्तानी झंडे को हाथों-हाथ लिया और इसको अपने चैनलों पर खूब चलाया, लेकिन अब क्योंकि 2019 में भी मोदी के ही आने की चर्चा चल रही है उसको देखते हुए पाकिस्तान हर वह संभव प्रयास कर रहा है जिससे इस सरकार की बदनामी हो सरकार की बदनामी हो। वैसे बाकी देशों के लिए यह आश्चर्य की बात हो सकती है कि भारत के चुनावों से पाकिस्तान का क्या लेना देना देना लेकिन यह स्पष्ट है कि पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे को युवाओं में उठाता रहा है और उसकी गंदी नजर कश्मीर हथियाने पर है। यही कारण है कि वह हमारे देश के विभिन्न इलाकों में आतंकवादी घटना कर ना सिर्फ देश के लोगों के बीच में भय का माहौल उत्पन्न करता है बल्कि वह अपनी खुफिया एजेंसी आईएसआई का इस्तेमाल पर कश्मीर में भी अराजकता को जन्म देता है। पुलवामा में हुए हमले के बाद से जिस प्रकार से अलगाववादी नेताओं पर कार्यवाही हुई है, उसने पाकिस्तान को कश्मीर से कुछ दिनों के लिए काट दिया है। आने वाले समय में पाकिस्तान अपने इसी प्रॉक्सी वॉर प्रॉक्सी वॉर को जारी रखना चाहता है। पिछले महीने से लेकर अब तक जिस प्रकार से पाकिस्तान में एक हलचल का माहौल देखा जा रहा है और उसके विभिन्न मुख्य शहरों में रात को ब्लैकआउट मारा जा रहा है, उसको देखते हुए स्पष्ट तौर पर कह सकते हैं कि पूरा पाकिस्तान इस समय भारत के द्वारा किए गए हमले से हाई अलर्ट पर है। यह डर बना रहना चाहिए बना रहना रहना चाहिए।


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