मोदी के मुकाबले कहाँ तक टिकेंगे राहुल

बालकोट हमले के बाद देश में पकिस्तान विरोधी माहौल के चलते प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ बेहद ऊंचाई पर है . लोकसभा चुनाव के लिए अपनी-अपनी पार्टियों के स्टार प्रचारकों राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी के प्रचार के अंदाज में भारी अंतर है. दोनों अपने-अपने तरीके से लोगों को अपनी ओर खींचते हैं.

जहां कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी का भाषण कामकाजी आदमी के जैसा होने से वोटदान मांगने वाले में बदल चुका है, वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता नरेंद्र मोदी पूरी तरह से आक्रामक और लड़ाकू मुद्रा में रहते हैं. गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी  भाजपा के प्रधानमंत्री पद प्रत्याशी हैं. उनके वाक कौशल पर कहीं से भी संदेह नहीं किया जा सकता है. इसी कला की बदौलत वे विरोधियों पर हमला बोलते हैं और श्रोताओं को खींचते हैं. वे पिछले महीने अपनी इस कला का जौहर राष्ट्रीय राजधानी में भी दिखा चुके हैं. कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी बुधवार से पहले तक मोदी के मुकाबले आक्रामक नहीं रहे थे.

अब तक तटस्थ रही शिवसेना ने बुधवार को कहा कि 2014 के बाद से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की ‘विकास पुस्तिका में सुधार हुआ है और उन्हें उनकी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा का भी समर्थन है लेकिन उन दोनों की तुलना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व से नहीं की जा सकती।

भाजपा के साथ बरसों की तकरार और इसकी नीतियों एवं नेताओं की आलोचना के बाद उसके और शिवसेना के बीच चुनाव पूर्व गठबंधन होने के दो दिन बाद उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली पार्टी की यह टिप्पणी आई है।

सीट समझौते को लेकर विपक्ष की आलोचना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये शिवसेना ने पार्टी के मुखपत्र ‘सामना के एक संपादकीय में कहा है कि गठबंधन को लेकर लोगों के दिमाग में कम लेकिन राजनीतिक विरोधियों के दिमाग में अधिक सवाल हैं क्योंकि इस गठबंधन की वजह से ”कीड़े मकोड़े कुचले जाएंगे।

मोदी के नेतृत्व का हवाला देते हुये इसमें कहा गया है, ”2014 की तुलना में राहुल गांधी की विकास पुस्तिका में सुधार हुआ है। उन्हें प्रियंका की भी मदद मिल रही है। हालांकि, इसकी तुलना मोदी के नेतृत्व से नहीं की जा सकती।

संपादकीय में कहा गया है कि शिवसेना और भाजपा के बीच कोई वैमनस्य नहीं है। आगे कहा गया है कि अगर (बिहार के मुख्यमंत्री और जदयू प्रमुख) नीतीश कुमार मोदी से वैचारिक मतभेदों के बावजूद राजग से जुड़ सकते हैं और अगर कांग्रेस ”महागठबंधन बना सकती है तो फिर तो शिवसेना भाजपा नीत राजग का हिस्सा हमेशा ही रही है।

पार्टी ने कहा है कि 2014 में कांग्रेस और उसके सहयोगियों के बीच गुस्सा था और मोदी के पक्ष में ”लहर थी। 2019 में विचारधारा, विकास के कार्यों तथा भविष्य के आधार पर लड़े जाएंगे।

मोदी और राहुल के बीच तुलना किए जाने के लिए कहे जाने पर प्रसिद्ध अभिनेता अनुपम खेर का कहना है , ‘मोदी अपने बूते उभरे हैं. ऐसा लगता है कि भारत के विकास के लिए उनके पास रोड मैप है. राहुल गांधी को बिना मेहनत के अब तक सबकुछ थाली में सजाकर मिलता रहा है, तो उन्हें हम लोगों को अभी भी बताना है कि भारत के भविष्य के लिए उनका क्या दृष्टिकोण है


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