चूहे की तरह बिलों में घुसाए हुर्रियत नेता -22 की सुरक्षा समाप्त

Parveen Komal
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पुलवामा में हुए आत्मघाती आतंकी हमले के बाद केंद्र और राज्य सरकार पूरी तरह ऐक्शन में आ गई है। सरकार ने इस से पहले 4 आतंकवाद समर्थक नेताओं की सुरक्षा वापिस ली थी और आज 18 और आतंकवाद समर्थकों की सुरक्षा वापिस लिए जाने के साथ ये गिनती  22 हो गई है ।
पुलवामा आतंकी हमले के बाद सरकार ने इन नेताओं को उनकी औकात दिखाते हुए एसएएस गिलानी, आगा सैयद मोसवी, मौलवी अब्बास अंसारी समेत 18 और हुर्रियत नेताओं में से कई की सुरक्षा हटा ली है 

जिन नेताओं की सुरक्षा हटाई गई है, उनमें एसएएस गिलानी, आगा सैयद मोसवी, मौलवी अब्बास अंसारी, यासीन मलिक, सलीम गिलानी, शहीद उल इस्लाम, जफर अकबर भट, नईम अहमद खान, मुख्तार अहमद वाजा, फारूक अहमद किचलू, मसरूर अब्बास अंसारी, आगा सैयद अबुल हुसैन, अब्दुल गनी शाह और मोहम्मद मुसद्दिक भट शामिल है.

केंद्र सरकार ने जहां इस आतंकी हमले का बदला लेने के लिए सुरक्षाबलों को खुली छूट दे दी है, वहीं जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने भी कड़ा निर्णय लेते हुए  अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा और गाड़ी सब वापस लेने का फैसला किया है। इन नेताओं पर सरकार करोड़ों रुपये खर्च करती थी और वे ऐश की जिंदगी जीते थे।

गृह मंत्रालय के मुताबिक, इन हुर्रियत नेताओं और राजनीतिक व्यक्तियों की सुरक्षा में 1000 से अधिक पुलिसकर्मी और 100 से अधिक सरकारी गाड़ियां लगी हुई थी.

इससे पहले सरकार ने चार हुर्रियत नेताओं मीरवाइज उमर फारूक, अब्दुल गनी बट्ट, बिलाल लोन, शब्बीर शाह की सुरक्षा वापस ली थी. इन नेताओं की सुरक्षा पर सरकार ने अभी तक करीब 15 करोड़ रुपये खर्च किए थे

1990 और 2002 में बड़े अलगाववादी नेता मीरवाइज फारूख और अब्दुल गनी लोन पर हमले के बाद सरकार ने अलगाववादियों को सुरक्षा देना शुरू किया था। सरकार अलगाववादियों पर साल में करीब 14 करोड़ रुपये खर्च करती है। 11 करोड़ सुरक्षा, 2 करोड़ विदेशी दौरे और 50 लाख गाड़ियों पर खर्च होते हैं। करीब 1000 जवान सुरक्षा में लगे रहते हैं। साल 2018 में जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2008 से लेकर 2017 तक अलगाववादियों को सुरक्षा मुहैया करवाने पर 10.88 करोड़ रुपये खर्च किये गए हैं।
अलगाववादियों को कोई कवर या सुरक्षा बल उपलब्ध नहीं कराए जाएंगे। उन्हें सरकारी गाड़ियों की सुविधा नहीं दी जाएगी। अगर उन्हें सरकार के द्वारा कोई दूसरी सुविधाएं मिल रही हैं तो वे भी तत्काल हटा ली जाएंगी। अलगाववादियों की सुरक्षा वापस लेने वाले ऑर्डर में यह भी कहा गया था कि बुधवार को इसकी अलग समीक्षा की जाएगी। आज इसी समीक्षा के आधार पर इन सभी भारत विरोधी नेताओं की सुरक्षा में लगे सभी सुरक्षा कर्मी हटा लिए हैं ।

गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था-सुरक्षा की होगी समीक्षा
पुलवामा हमले के अगले दिन केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह कश्मीर गए थे। वहां उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी (ISI) से संपर्क रखने वालों को दी जा रही सुरक्षा की समीक्षा की जाएगी। सुरक्षा हटने के बाद ये अलगाववादी नेता चूहे की तरह अपने अपने बिलों में दुबकने को मजबूर हो जाएंगे।


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