हाईकोर्ट पहुंच सकता है अब्दुलपुर में सरपंची की डिफाल्टर उम्मीदवार का मामला

Baljinder Singh Complaint

शंभू ब्लॉक की पंचायती चुनाव में एक ऐसे उम्मीदवार की पत्नी और रिश्तेदार ने भी कागज दाखिल कर डाले जिसके ऊपर नशा तस्कर होने का इल्जाम है और जिसके ऊपर थाना खेडी गंडीआं में पोस्त चूरा बेचने के जुर्म में मुकद्दमा नंबर 103 दर्ज है । इस मामले में भुक्की तस्कर को अदालत से सजा भी हुई है।
 उम्मीदवार पानी के बिल की डिफाल्टर भी है । इस सिलसिले में  बलजिंदर सिंह   पुत्र बलकार सिंह निवासी अब्दुल पुर ब्लॉक शंभू ने चुनाव अधिकारियों को शिकायत करते हुए और हलफ़िया बयान देते हुए बताया है कि नशीले पदार्थ बेचने के दोषी की पत्नी परमजीत कौर ने भी इस चुनाव में सरपंची के चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल कर दिए थे।बलजिंदर सिंह के मुताबिक सरपंची के चुनाव में मनजीत कौर और परमजीत कौर दोनों ने अब्दुल पुर गांव की सरपंची के लिए नामांकन पत्र दाखिल किए थे जब कि चुनावी नियमों के चलते यह दोनों ही चुनाव नहीं लड़ सकती थी। मनजीत कौर और परमजीत कौर आपस में देवरानी जेठानी हैं और एक ही परिवार से संबंधित है। गौरतलब है कि सरपंची के लिए या पंच चुने जाने के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने के वक्त भरे जाने वाले फार्म में स्पष्ट तौर पर यह घोषणा करनी पड़ती है कि उम्मीदवार की तरफ ग्राम पंचायत या जिला पंचायत समिति का कोई भी बकाया नहीं। इसके बाद पंचायत सचिव की रिपोर्ट पर जूनियर इंजीनियर की रिपोर्ट के पश्चात संबंधित समिति का पंचायत ऑफीसर नो ड्यूज सर्टिफिकेट जारी करता है लेकिन बलजिंदर सिंह ने दोष लगाया है कि परमजीत कौर और मनजीत कौर के परिवारों पर पिछले कई महीनों से जल सप्लाई सैनिटेशन कमेटी अब्दुल पुर का पानी का बिल बकाया है जो अभी तक इन्होंने नहीं भरा और इस तरह यह दोनों परिवार ग्राम पंचायत गांव अबदूलपुर के डिफाल्टर है और इनको नियमों के अनुसार चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं।
इसके अलावा मनजीत कौर और परमजीत कौर ने सरकारी अधिकारियों को गुमराह करके झूठ बोलकर गलत सूचना देकर आटा दाल स्कीम के राशन कार्ड बनवाए थे लेकिन जब इसकी लोगों ने शिकायत की तो मुकम्मल जांच पड़ताल करने के बाद एसडीएम राजपुरा की तरफ से गैरकानूनी आटा दाल कार्डों को रद्द करने के लिए खुराक और सप्लाई विभाग के राजपुरा अधिकारियों को पत्र लिखा गया था जिसके बाद यह राशन कार्ड तो रद्द कर दिए गए थे लेकिन इस तरह की ठगी किए जाने के खिलाफ अधिकारियों द्वारा इन लोगों के राजनीतिक संपर्कों के चलते कोई भी पुलिस केस दर्ज नहीं किया गया था। यह सारी बातें सरकार के रिकॉर्ड में मौजूद हैं और चुनाव अधिकारियों को इसकी कॉपी मुहैया करवा दी गई थी। पंचायती चुनावों में कागज दाखिल कर के सरपंच बनने की लालसा रखने वाली परमजीत कौर के पोस्त चूरा विक्रेता पति दलबीर सिंह के बारे में अखबारों में भी खबरें प्रकाशित हुई थी और अदालत में इसके खिलाफ दर्ज मुकदमे को सही पाया गया था और इन लोगों को कैद में रखने की सजा और 3000 जुर्माना भी किया गया था।
गौरतलब है के इन उम्मीदवारों के नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद यह सारे तथ्य दस्तावेजी सबूतों के साथ रिटर्निंग ऑफीसर को लिखती तौर पर 20 दिसंबर 2018 को दे दिए गए थे लेकिन इतने पुख्ता सबूत होने के बावजूद भी मनजीत कौर को चुनाव अधिकारी द्वारा सरपंची का चुनाव लड़ने के लिए योग्य घोषित कर दिया गया। एक तरफ तो पंजाब सरकार नशा विरोधी तस्करों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए टास्क फोर्स का गठन करती है और निष्पक्ष चुनाव करवाने का ढिंढोरा पीटती है दूसरी तरफ ऐसे डिफाल्टर लोगों को सरपंची का उम्मीदवार बना दिया जाता है। इन सारी अनियमितताओं के खिलाफ इस इलाके के लोग पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने को उतारू हो गए है । इस सिलसिले में जब पड़ताल की गई तो सामने आया कि डिफाल्टर उम्मीदवार को राजनैतिक संरक्षण प्राप्त है । गौरतलब है कि मनजीत कौर ने झूठी सूचना देकर 15 जून 2016 को राशन कार्ड नंबर पीटीएल 4691468 बनवाया था और परमजीत कौर ने भी इसी तरह झूठी सूचना देकर अपना राशन कार्ड बनवाया था और इन राशन कार्डों पर गरीबों को दी जाने वाली गेहूं की रसद प्राप्त कर ली थी लेकिन जब एसडीएम राजपुरा द्वारा पत्र नंबर 169 दिनांक 25 अप्रैल 2017 को ये राशन कार्ड और नीला कार्ड रद्द किए जाने सबंधी फूड एंड सप्लाई अफसर राजपुरा को हिदायत दी गई तो उसके बाद ना तो सरपंची की उम्मीदवारी के दावेदारों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की गई और ना ही इनके द्वारा ठगी करते हुए सरकार से हड़पा गया गेहूं बरामद करवाया गया और ना ही इस गेहूं की कीमत जमा करवाई गई जिससे राजनीतिक दबाव के चलते अधिकारियों की नाकामी के सबूत सामने आते हैं ।सवाल ये पैदा होता है कि अगर ऐसे डिफाल्टर उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने की इजाजत दी जाती है और ऐसे डिफाल्टर उम्मीदवारों को चुना जाता है तो क्या इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ पंजाब सरकार को कार्रवाई नहीं करनी चाहिए? इस क्षेत्र के लोगों की मांग है कि जब तक इस मामले का हल नहीं हो जाता तब तक इस क्षेत्र के चुनाव स्थगित किए जाएं


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