राफेल सौदे में घोटाले के इल्जाम का जहाज सुप्रीम कोर्ट में क्रैश

अब कॉंग्रेस कैसे सफाई देगी मोदी को चोर कहने की

Report : Parveen Komal
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अब कॉंग्रेस कैसे सफाई देगी मोदी को चोर कहने की कियूंकि राफेल सौदे को लेकर एक बार फिर कांग्रेस और उसके सहयोगियों को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के कारण हार का सामना करना पड़ा है।

गौरतलब है कि कांग्रेस ने अपने चुनावों में राफेल सौदे में घोटाला किए जाने के सिलसिले में अपनी चुनाव सभाओं में भाषणों की झड़ी लगा दी थी और राहुल गांधी ने हर सभा में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को चोर तक कह डाला था, इसके अलावा राहुल गांधी के राइट हैंड नवजोत सिंह सिद्धू ने भी प्रधानमंत्री को और उनके साथियों को चोर और कुत्ता तक कहकर भाषण दिए थे और सरकार की छवि इस कदर बदनाम कर दी थी कि जिससे आम वोटर भाजपा के खिलाफ हो गए और जिसका नतीजा पांच राज्यों के चुनावों में तीन राज्यों में भाजपा को हार के रूप में भुगतना पड़ा। हालांकि असलियत यह थी कि राफेल सौदा पूरी तरह से कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए पारदर्शिता से किया गया था जिस पर सुप्रीम कोर्ट के 3 जजों की बेंच ने अपनी मुहर लगा दी, लेकिन सवाल पैदा यह उठता है कि आखिर कांग्रेस द्वारा की गई प्रधानमंत्री मोदी की मानहानि की भरपाई कौन करेगा? क्या राहुल गांधी या फिर नवजोत सिद्धू ? नवजोत सिद्धू ने तो पाकिस्तान में भी हिंदुस्तान की विरोधी और कट्टर दुश्मन फौज के सामने भी राफेल सौदे को लेकर कटाक्ष किए थे जिससे पाकिस्तानी फौज का मनोबल बढा था और भारतीय फौज में आशा की भावना पैदा हुई थी। इसके अलावा कांग्रेस ने जोर-शोर से मांग की थी कि राफेल सौदे से जुड़े दस्तावेजों को सार्वजनिक किया जाए। शायद कांग्रेस यह जानबूझ कर कर रही थी या कांग्रेस नेतृत्व इतना भोला है कि उसको नहीं पता कि ऐसे दस्तावेज अगर सार्वजनिक हो जाते तो सामरिक मोर्चों पर भारतीय फौज को बेहद जान माल की हानि का नुकसान भी करना पड़ सकता था, लेकिन भाजपा के विरोध में और आम वोटरों को भाजपा के खिलाफ भड़काने की रणनीति के चलते कांग्रेस ने देश की सुरक्षा से सबंधित इस महत्वपूर्ण मुद्दे को भी ताक पर रख दिया और देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करना चाहा। कांग्रेस के अलावा आम आदमी पार्टी के गुर्गो ने भी अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली थी कि राफेल सौदा रद्द करके इसकी जांच सीबीआई को सौंपी जाए जिसके चलते सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को भी कटहरे में खड़ा किया था और सारे दस्तावेज मांगे थे लेकिन सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि अगर यह दस्तावेज सार्वजनिक किए गए तो देश की सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। रक्षा सौदों से जुड़े नियमों की गोपनीयता के चलते राफेल सौदे से जुड़े हुए हर एक दस्तावेज को, जिसमें उसकी कीमत और राफेल में लगे हुए हथियारों का विवरण भी शामिल था सुप्रीम कोर्ट की बेंच के सामने सीलबंद लिफाफे में पेश किया गया और माननीय प्रबुद्ध जजों ने दस्तावेजों का पूरी गहराई के साथ तकनीकी रूप से अध्ययन किया और उसके बाद एक मत से इस निर्णय पर पहुंचे कि इन दस्तावेजों को सार्वजनिक करना भारत की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने के समान होगा और इससे देश की सुरक्षा को बहुत बड़ी क्षति पहुंच सकती है ।

गौरतलब है कि भारत सरकार ने भारतीय वायुसेना की हमलावर क्षमता बढ़ाने के लिए लगभग 58,000 करोड़ रुपये में 36 राफेल लड़ाकू विमानों के लिए फ्रांस सरकार की कंपनी के साथ समझौता किया है। दो इंजन वाले इस जबरदस्त लड़ाकू विमान का निर्माण फ्रांस की सरकारी कंपनी दसाल्ट एविशन द्वारा किया जाता है।
इस सिलसिले में सरकार का पक्ष रखते हुए अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने दलील दी थी कि 2016 के एक्सचेंज रेट के मुताबिक खाली राफेल जेट की कीमत 670 करोड़ रुपये है। लेकिन पूरी तरह से हथियारों से लैस राफेल विमान की कीमत को इसलिए सार्वजनिक नहीं किया जा सकता, क्योंकि इससे देश के दुश्मन फायदा उठा कर हमें नुकसान पहुंचा सकते हैं।
इसके चलते सुप्रीम कोर्ट आफ इंडिया के मुख्य न्यायाधीश श्री राजन गोगोई की अध्यक्षता में फैसला दिया गया कि राफेल सौदा पूरी तरह से पारदर्शिता के साथ किया गया है और इसमें किसी को किसी तरह का अनुचित लाभ नहीं पहुंचाया गया इसलिए यह सभी याचिकायें रद्द की जाती हैं और इन पर विचार करने का कोई तुक नहीं बनता ।
अदालत ने कहा कि मीडिया में दिए गए इंटरव्यू अदालती फैसलों का आधार नहीं बन सकते। शुक्रवार की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि सौदे की खरीद प्रक्रिया में किसी भी किस्म की कोई कमी नहीं पाई गई । अदालत ने कीमत के मुद्दे पर सरकार की ओर से पेश किए गए जवाब को रिकार्ड करते हुए कहा कि सरकारी रक्षा सौदों की कीमतों की तुलना करना अदालत का काम नहीं है। कोर्ट ने कहा कि राफेल डील पर किसी भी प्रकार का कोई शक शुब्हा नहीं हैै, वायुसेना को इस तरह के विमानों की जरूरत है और इस सौदे में प्रक्रिया का पालन किया गया है। अदालत सरकार के 36 विमान ख़रीदने के फ़ैसले मे दख़ल नहीं दे सकती।
अब सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को लेकर उन सभी राजनीतिक पार्टियों को देश से माफी मांगने चाहिए जिन्होंने सिर्फ वोट बैंक बढ़ाने के लालच में झूठ सफेद झूठ बोलकर आम जनता को गुमराह किया और बरगला कर भारतीय जनता पार्टी किस्सा को धक्का पहुंचाते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और अन्य मंत्रियों अधिकारियों,जिनमे भारतीय सेना भी शामिल है को अपमानित किया और देश में एक तरह से बगावत का माहौल पैदा करने का प्रयत्न किया। प्रधानमंत्री को राफेल मामले में चोर कहने के गुनाह के लिए राहुल गांधी और नवजोत सिंह सिद्धू को बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए ताकि अब लोगों में उनके प्रति पैदा हो रहे गुस्से को कंट्रोल किया जा सके । सुप्रीम कोर्ट में हार का मुंह देखने वालों में वकील एमएल शर्मा, विनीत ढांडा, प्रशांत भूषण, आप नेता संजय सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी शामिल हैं।
राफेल सौदे की जांच के मामले में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस के एम जोसेफ की पीठ ने ये ऐतेहासिक फैसला सुनाया।
अब भारत के आम नागरिक कांग्रेस नेतृत्व से सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर उन्होंने अपने भाषणों में ऐसी झूठी और बेतुकी बातें किस लिए की और लोगों को भ्रमित कर के बेवकूफ बनाने का काम क्यों किया।


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