नवजोत सिंह सिद्धू  की हरकतों और बयानबाजी से सारे देश को निराशा  

मुद्दतों खटकती रहेगी यह जफ्फी देशभक्तों को

नवजोत सिंह सिद्धू की हरकतें और बयानबाजी से अब सारे देश को निराशा  होने लगी है।  उनके प्रशंसक भी उनसे परेशान और निराश हो रहे हैंI एक पूर्व सांसद और वर्तमान में पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री को यह कतई शोभा नहीं देता कि वे यह कहें कि उन्हें भारत के दक्षिणी सूबे के किसी भाग में जाने की अपेक्षा पाकिस्तान के पंजाब में जाकर अधिक अपनत्व का भाव महसूस होता है।निश्चित रूप से इस तरह के उदगार व्यक्त करके वे कहीं न कहीं भारत की विविधता का अनादर करते नजर आते हैं।  उन्होंने ये बातें विगत दिनों कसौली में आयोजित हुए खुशवंत सिंह लिटरेचर फेस्टिवल के दौरान कहीं।

 

 

नवजोत सिंह सिद्धूजिस पाकिस्तान को लेकर इतने उत्साहित रहते हैंउन्हें याद रखना चाहिए कि उनके भारत में एक दर्जन से अधिक भाषाओं को राष्ट्रीय भाषा का दर्जा प्राप्त हैं। इसी भारत में एक छोटे से सिख समाज का व्यक्ति देश का प्रधानमंत्री बनता है। इसी भारत में इटली में जन्मीं  सोनिया गांधी विपक्ष की शिखर नेता रह सकती हैं। इसी भारत का एक छोटा सा पारसी समाज सारे देश का सम्मान लेता है अपनी उपलब्धियों के कारण। इस तरह के अनेक उदाहरण सिद्ध को दिए जा सकते हैं, ताकि वे भारत की विविधता को समझें। क्या उन्हें मालूम है कि वे जिस पाकिस्तान के हिस्से वाले पंजाब को लेकर वे अति भावुकता का प्रदर्शन कर रहे हैंवहां पर पंजाबी भाषा की कितनी दुर्दशा हो रही हैवहां पर पंजाबी स्कूलों या कॉलेजों में पढ़ाई तक नहीं जाती है। क्या उन्हें ज्ञात है कि वहां के पंजाब के एसेंबली में पंजाबी के बोलने तक पर रोक है?  इसके विपरीत भारत में एक उस भाषा को भी राष्ट्र भाषा का स्थान मिला जिसके बोलने वाले थोड़े से लोग देश के विभाजन के बाद भारत आ गए थे। हम बात कर रहे हैं सिंधी भाषा की।

नवजोत सिंह सिद्धू को कौन बताए कि भारत की शक्ति और उसकी खूबसूरती उसकी धार्मिकसांस्कृतिक,भाषाई प्रादेशिक और तमाम अन्य स्तरों में दिखाई देने वाली विविधताओं में ही निहित हैं। इस तथ्य के कारण सारा विश्व भारत का सम्मान करता है।निस्संदेह भारत और पाकिस्तान के पंजाब में बहुत सारी समानताएं तो हैं हीं। दोनों की जुबानें एक हैंखान-पान और रहन-सहन भी एक जैसा ही है। आखिरकार 15 अगस्त 1947 तक पंजाब भारत का ही अभिन्न हिस्सा था। पर 1947 के बाद पंजाब भी दो भागों में बंटा। सरहद के उस पार वाला पंजाब इस्लामिक कट्टरता का केन्द्र बन गया है। उसी पंजाब में खौफ का पर्याय ओसामा बिन लादेन अपना साम्राज्य चलाता है। वहां पर रहकर ही हाफिज सईद और मौलाना अजहर महसूद योजनाएं और रणनीति बनाते हैं ताकि भारत को तरह-तरह से चोट पहुंचाई जा सके। पिछले साल  भारत के पंजाब के पठानकोट में पाकिस्तानी घुसपैठियों ने खून-खराबा किया था। अब नवजोत सिंह सिद्धू जिस पंजाब को लेकर भावुक होने का नाटक कर रहे हैंउसमें नानक,बुल्ले शाह और दूसरे गुरुओं और फकीरों के प्रवचन और विचार शायद उनके दिमाग के नेपथ्य में चले गए हैं। वहां पर उन्हें अब बंदूकों की गोलियों की आवाजों में सुकून और आनंद का अनुभव होता हैं। 


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