जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्य पाल मलिक ने सबको चौंकाते हुए राज्य की विधान सभा को भंग कर दिया है .

इससे पहले बुधवार को दिनभर राज्य में नई सरकार बनने की ख़बरें उड़ती रहीं. लेकिन सरकार बनाने की इस रेस में कांग्रेस, नेशनल कांफ़्रेंस और पीडीपी का गठबंधन आगे दिख रहा था. हो गया उल्टा । शाम होते ही राज्यपाल ने सत्ता के लिए आतुर सभी नेताओं की आशाओं पर डल झील जैसा ठंडा पानी फेरते हुए विधानसभा को ही भंग कर दिया.

 बुधवार को पीडीपी-एनसी-कांग्रेस गठबंधन और पीपल्स पार्टी के प्रमुख सज्जाद लोन की ओर से अपनी-अपनी सरकार बनाने का दावे पेश किये गए थे.

लेकिन सरकार बनाने की कोशिशें विफल हो गईं.

विधानसभा भंग करने का आदेश जारी करते हुए राज्यपाल ने कहा, “मैं क़ानून के तहत प्राप्त अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए विधान सभा को भंग करता हूँ.”जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल का नोटिस

इस साल जून में पीडीपी और बीजेपी के गठबंधन से चल रही सरकार गिर गई थी. उसके बाद से असेंबली को कोई दूसरी सरकार बनने की उम्मीद में भंग नहीं किया गया था.

फेल हुई सरकार बनाने की कोशिश

पीडीपी के नाराज़ नेता मजफ़्फ़र बेग ने मंगलवार को चेताया था कि अगर ये तीनों दल गठबंधन सरकार बनाते हैं तो जम्मू-कश्मीर के तीन टुकड़े हो जाएंगे.

बुधवार को ही पीडीपी, नेशनल कांफ़्रेंस और कांग्रेस ने पुष्टी की थी कि वो तीनों मिलकर जम्मू-कश्मीर में गठबंधन सरकार बनाने की संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं.

नेशनल कांफ़्रेंस ने बेग के इस बयान की निंदा की और कहा कि कांग्रेस, पीडीपी और नेशनल कांफ़्रेंस ने जम्मू-कश्मीर पर शासन किया है और तीनों क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं.

जम्मू-कश्मीर की सियासत

लेकिन अब बदल गया है सारा सूरतेहाल

विधान सभा भंग होने से पहले पीडीपी के पास 28 और कांग्रेस के पास 12 विधायक थे. पीपल्स कांन्फ़्रेंस के पास दो और बीजेपी के 25 एमएलए थे.

सज्जाद लोन ने एनसी, पीडीपी और कांग्रेस की मदद से बहुमत का 44 का आकड़ा पार करने की कोशिश की, लेकिन उससे पहले ही राज्यपाल ने विधान सभा भंग कर दी.