पुलिस की वर्दी में धड़कता मां का दिल

Report : Parveen Komal
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उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के थाना कोतवाली में कदम रखते ही आपकी नजरें महिला सिपाही अर्चना जयंत पर पड़ेंगी। एक टेबल के पास विजिटर रजिस्टर पर कुछ काम करते हुए कार्यरत नजर आती हैं लेकिन जब थोड़ा करीब जाएंगे तो टेबल पर एक मासूम बच्ची को देखकर आप को हैरानी होगी। असल में, यह बच्ची अर्चना की 6 महीने की बेटी अनिका है। अर्चना ड्यूटी के साथ-साथ थाने में ही अपनी बेटी को भी पालने का फर्ज निभा रही हैं।
वह ममतामयी मां का फर्ज घर में तो निभाती ही है पर साथ ही डयूटी के दौरान पुलिस की वर्दी में काम के समर्पण का सामंजस्य बैठाकर पुलिस के संवेदनशील, समर्पित चेहरे को प्रस्तुत कर लोगों को उदाहरण प्रस्तुत कर रही है। ऐसा बहुमुखी पात्र है उत्तर प्रदेश पुलिस की आदर्श महिला कांस्टेबल अर्चना का।

सोशल मीडिया पर बुन्देलखण्ड की हृदय स्थली वीरांगना लक्ष्मीबाई की नगरी झांसी के थाना कोतवाली में महिला कांस्टेबल अर्चना जयंत जाटव को अपनी छह माह की दुधमुंही लाड़ली बेटी के साथ मां की ममता व वर्दी का फर्ज निभाते देख पुलिस के प्रति लोगों की सोच इस एहसास के साथ बदल डाली कि कठोर खाकी के अंदर भी मां का दिल धड़कता है। जब यह बात झांसी रेंज के पुलिस उप महानिरीक्ष सुभाष सिंह बघेल को पता लगी तो कर्त्तव्य पराणयता के लिए उन्होंने कांस्टेबिल अर्चना को एक हजार रुपए के पुरस्कार की घोषणा कर दूसरे कर्मियों को भी कर्त्तव्य निभाने के लिए प्रोत्साहित किया।

कानपुर के बर्रा निवासी राजेन्द्र प्रसाद जाटव की पुत्री अर्चना जयंत जाटव ने एमए/बीएड कर चुकी हैं, किन्तु पुलिस के अनुशासन व कार्यप्रणाली ने उन्हें पुलिस की सेवा के लिए प्रेरित किया और उनका चयन 2016 में उत्तर प्रदेश पुलिस में महिला कांस्टेबिल के पद पर हो गया और पहली तैनाती झांसी के थाना कोतवाली में हुई। उनका विवाह नौकरी के पूर्व ही मारुति कम्पनी गुड़गांव में कार्यरत अकाउण्ट मैनेजर नीलेश जयंत से हो गया था, किन्तु नौकरी की चाह ने उन्हें पुलिस में सेवा का अवसर दिया। वह पूरी मुस्तैदी के साथ मां व नौकरी का फर्ज निभाती हैं।

अर्चना की दस वर्ष एक पुत्री कनक और दूसरी छह माह की अनिका है। अनिका के जन्म लेने के पूर्व ही उन्होंने मेटरनिटी लीव ली थी और एक माह पूर्व ही वह अपनी डयूटी पर वापस आयी थीं, किन्तु अनिका को वह अकेला नहीं छोड़ सकतीं थीं इसलिए वह उसे साथ लेकर ही अपनी डयूटी को अंजाम दे रही हैं।

अर्चना की ड्यूटी पुलिस भर्ती परीक्षा में एक परीक्षा केन्द्र में लगाई गई थी। जब वह कोतवाली से ड्यूटी पर रवाना होने वाली थी तभी कोतवाल उमेश चंद्र त्रिपाठी ने बच्चे को साथ में देख कर उसकी ड्यूटी परीक्षा केंद्र से हटवा कर कोतवाली के रिसेप्शन पर लगा दी थी।

यहां भी अर्चना की ड्यूटी के प्रति निष्ठा कम नहीं दिखी और वह लाड़ली व ड्यूटी के बीच सामंजस्य बैठा कर काम कर रही है। लाड़ली कभी रोती तो कभी मुस्कराती, कभी सो जाती और इन सबके बीच अर्चना मां की ममता व डयूटी की कर्त्तव्य परायणता का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत कर रही है। साथी महिला व पुरुष सहकर्मी अर्चना की कर्त्तव्य परायणता को सलाम करते हैं।

कोतवाली में हुआ था मुंडन
अर्चना की कर्त्तव्य  के प्रति लगन का यह भी उदाहरण है कि नवरात्रि की ड्यूटी में जब छुट्टियां नहीं थी और काम बहुत अधिक था तब अर्चना ने ड्यूटी के दौरान अपनी लाड़ली का मुंडन संस्कार भी कोतवाली थाने में बने एक मंदिर में करवाया था।

इस मुण्डन संस्कार में कोतवाली में तैनात पुलिस स्टाफ ने परिवार की भूमिका अदा की थी। गौरतलब है कि पुलिस विभाग एक ऐसा विभाग है जहां त्यौहार हो या कोई भी ख़ुशी का दिन, पुलिस जनता की सुरक्षा में तैनात रहकर ही अपनी खुशियां मना लेती है।
कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान ने अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष करने वाली रानी लक्ष्मीबाई के लिए कभी लिखा था- ‘खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी।’ झांसी, उत्तर प्रदेश का वही जिला है, जहां घुड़सवार रानी लक्ष्मीबाई ने अपने बच्चे को पीठ पर बांधकर अंग्रेजों से जांबाज टक्कर ली थी। उसी झांसी की कोतवाली में पुलिस की नौकरी करती हैं महिला कांस्टेबल अर्चना जयंत जिसके कर्तव्ययुक्त मातृत्व को पूरा देश सराह रहा है ।


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