FIR : 14 साल की सजा वाली धारा लगी यू ट्यूब पर खबर डालने वाले पर

पटियाला के एक मोहल्ले त्रिपड़ी में यू ट्यूब पर टी 84 के नाम से खबर के नाम पर वीडियो डाल डाल कर   अपने आपको पत्र कार कहने वाले गुरप्रीत सिंह थिंद, व उसके 6 अन्य साथियों के खिलाफ पंजाबी बाग की रहने वाली एक शरीफ महिला ने गंभीर दोषों के तहत एफ आई आर दर्ज करवाई है । पीड़ित महिला ने सिविल लाइन पुलिस को दी गई शिकायत में दोष लगाया था कि इन लोगों ने उसकी वीडियो नेट पर डालकर वायरल करने की धमकी दी । सिविल लाइन पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 458,506,511 तथा 120 बी आईपीसी के तहत एफ आई आर दर्ज करके इन लोगों की तलाश शुरू कर दी है। पीड़ित महिला ने गुरप्रीत सिंह थिंद और उसके छह अन्य साथियों के खिलाफ शिकायत दी थी कि गु. थिंद और उसके साथियों ने उसको जान से मारने की धमकियां भी दी थी और रात को कुछ लोगों ने जबरदस्ती उसके गेट से घर में घुसने का प्रयास किया जिसकी सी सी टी वी कैमरा फुटेज के आधार पर और तथ्यों की छानबीन करने के उपरांत घटनाक्रम सही पाया गया और सब इंस्पेक्टर करनैल सिंह ने इन अभियुक्तों के खिलाफ मामला पर्चा दर्ज कर लिया । इस मामले में लगी धाराएं काफी सख्त हैं , इंडियन
पीनल कोड की धारा 458 के तहत – क्षति, हमला या सदोष अवरोध की तैयारी के करके रात में घर में जबरदस्ती प्रवेश अपराध है । जो भी कोई किसी व्यक्ति को क्षति पहुँचाने या उस पर हमला करने या उसका सदोष अवरोघ करने की अथवा किसी व्यक्ति को क्षति, या हमले, या सदोष अवरोध के भय में डालने की तैयारी करके, रात में छिप कर गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन करेगा, तो उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास जिसे चौदह वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है से दण्डित किया जाएगा और साथ ही वह आर्थिक दण्ड के लिए भी उत्तरदायी होगा। इसमे लागू अपराध के मुताबिक
नुकसान पहुंचाने आदि की तैयारी करके रात में छिप कर गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन करना। इसकी सजा – चौदह वर्ष कारावास और आर्थिक दंड है।
यह एक गैर-जमानती, संज्ञेय अपराध है और प्रथम श्रेणी के मेजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है। यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं है।
इंडियन पीनल कोड 511 के तहत- आजीवन कारावास या अन्य कारावास से दण्डनीय अपराधों को करने का प्रयत्न करने के लिए दण्ड का प्रावधान है ।
जो भी कोई इस संहिता द्वारा आजीवन कारावास से या अन्य कारावास से दण्डनीय अपराध करने का, या ऐसा अपराध कारित किए जाने का प्रयत्न करेगा, और ऐसे प्रयत्न में अपराध करने की दिशा में कोई कार्य करेगा, जहां कि ऐसे प्रयत्न के दण्ड के लिए कोई स्पष्ट रूप से कथित प्रावधान इस संहिता द्वारा नहीं किया गया है, तो उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास जिसे आजीवन कारावास से आधी अवधि तक या उस अपराध के लिए उपबन्धित दीर्घतम अवधि से आधी अवधि तक बढ़ाया जा सकता है या उस अपराध के लिए उपबन्धित आर्थिक दंड से या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
इसमे लागू अपराध के तहत आजीवन कारावास से या अन्य कारावास से दण्डनीय अपराध करने का, या ऐसा अपराध कारित किए जाने का प्रयत्न
सजा – आजीवन कारावास या दीर्घतम अवधि से आधी अवधि के लिए कारावास या आर्थिक दंड या दोनों से दण्डित किया जाएगा । इसमें जमानत, संज्ञान और अदालती कार्रवाई, किए गये अपराध या अपराध कारित किए जाने के प्रयत्न के अनुसार होगी। यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं है।
इंडियन कानून धारा 506 आईपीसी – इंडियन पीनल कोड के तहत धमकाना के लिए लगाई जाती है।
इसके अंतर्गत जो कोई भी आपराधिक धमकी का अपराध करता है, तो उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास जिसे दो साल तक बढ़ाया जा सकता है या आर्थिक दंड या दोनों के साथ दंडित किया जा सकता है।
यदि धमकी मृत्यु या गंभीर चोट, आदि के लिए है – और यदि धमकी मौत या गंभीर चोट पहुंचाने, या आग से किसी संपत्ति का विनाश कारित करने के लिए, या मृत्युदंड या आजीवन कारावास से दंडनीय अपराध कारित करने के लिए, या सात वर्ष तक की अवधि के कारावास से दंडनीय अपराध कारित करने के लिए, या किसी महिला पर अपवित्रता का आरोप लगाने के लिए हो, तो अपराधी को किसी एक अवधि के लिए कारावास जिसे सात साल तक बढ़ाया जा सकता है, या आर्थिक दंड, या दोनों के साथ दंडित किया जा सकता है।

इस धारा के तहत लागू अपराध के अंतर्गत 1. आपराधिक धमकी के लिए सजा इस प्रकार है ।
सजा – 2 वर्ष कारावास या आर्थिक दंड या दोनों। यह एक जमानती, गैर-संज्ञेय अपराध है और प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
2. यदि धमकी मृत्यु या गंभीर चोट पहुंचाने, आदि के लिए है।
सजा – 7 वर्ष कारावास या आर्थिक दंड या दोनों होंगे । यह एक जमानती, गैर-संज्ञेय अपराध है और प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी के तहत किसी भी अपराध को अंजाम देने के लिए साझा साजिश यानी कॉमन कॉन्सपिरेसी का मामला गुनाह की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में भारतीय दंड संहिता यानी आईपीसी की धारा 120बी का प्रावधान है।
जिस भी मामले में आरोपियों की संख्या एक से ज्यादा होती है, तो पुलिस की एफआईआर में आमतौर पर धारा 120बी का जिक्र जरूर होता है। यह जरूरी नहीं है कि आरोपी खुद अपराध को अंजाम दे। किसी साजिश में शामिल होना भी कानून की निगाह में गुनाह है। ऐसे में साजिश में शामिल शख्स यदि फांसी, उम्रकैद या दो वर्ष या उससे अधिक अवधि के कठिन कारावास से दंडनीय अपराध करने की आपराधिक साजिश में शामिल होगा तो धारा 120 बी के तहत उसको भी अपराध करने वाले के बराबर सजा मिलेगी। अन्य मामलों में यह सजा छह महीने की कैद या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। इस लिहाज से पीड़ित महिला के आरोपों पर दर्ज एफ आई आर सभी अभियुक्तों के गले की फांस बन गई है ।


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