कंगले ब्रिटेन ने भारत को लूट कर गरीब बना दिया था

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री प्रसिद्ध अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह ने ब्रिटेन द्वारा भारत को लूटने के चक्र की तरफ़ इशारा करते हुए कहा था :

‘इसमें कोई शक नहीं कि ब्रिटेन सरकार के ख़िलाफ़ हमारी शिकायतों की ठोस आधार मौजूद है… 1700 में भारत अकेला दुनिया की 22.6 फ़ीसद दौलत पैदा करता था, जो तमाम यूरोप के समग्र हिस्से के तक़रीबन बराबर थी. लेकिन यही हिस्सा 1952 में घिर कर 3.8 फ़ीसद रह गया. 20वीं शताब्दी के आगाज़ पर ‘ताज-ए-ब्रितानिया का सबसे नायाब हीरा’ हक़ीक़त में प्रति व्यक्ति आय के हिसाब से दुनिया का सबसे गरीब देश बन गया था.’

अब इस सवाल की तरफ़ आते हैं कि अंग्रेज़ों अंग्रेज़ों के दो सौ साल के शोषण ने भारत को कितना नुक़सान पहुंचाया.

इस सिलसिले में विभिन्न लोगों ने विभिन्न अंदाज़े लगानेकी कोशिश की है. इनमें से ज़्यादा प्रशंसनीय अनुमान अर्थशास्त्र के विशेषज्ञ और पत्रकार मेहनाज़ मर्चेन्ट की रिसर्च है. इनके मुताबिक़ 1757 से लेकर 1947 तक अंग्रेज़ों के हाथों भारत को पहुंचने वाले आर्थिक नुक़सान की कुल रक़म 2015 के फ़ॉरेन एक्सचेंज के हिसाब से 30 खरब डॉलर बनती है.

ज़रा एक मिनट रूक कर इस रक़म का अंदाज़ा लगाने की कोशिश कीजिए. इसके मुक़ाबले पर नादिर शाह बेचारे दिल्ली को दिल्ली से सिर्फ़ 143 अरब डॉलर लूटने ही पर संतोष करना पड़ा था.

चार सौ साल पहले जहांगीर के दरबार में अंग्रेज़ राजदूत को शक था कि क्या वाक़ई भारत इतना अमीर है कि इसके शहनशाह को सोने चांदी और हीरे जवाहारात में तौला जा सकता है, और कहीं दूसरे पलड़े में दरबारियों ने रेशम की थैलियों में पत्थर तो नहीं डाल दिए?

अगर किसी तरह सर थॉमस रो को वापस लाकर उन्हें ये आंकड़ें दिखा दिए तो शायद उनका भ्रम हमेशा के लिए दूर हो जाए.


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