महताब सिंह को जज नहीं मानते सुखबीर बादल


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जैन ने गिल के तबादले की सिफारिश भी कर दी थी.. महताब सिंह गिल और रंजीत सिंह को

अकाली प्रधान सुखबीर बादल ने कांग्रेसी बताया है.

अंमृतसर में पत्रकारों के साथ बातचीत करते हुए सुखबीर बादल ने खुलासा किया कि

जस्टिस महताब सिंह गिल कांग्रेसी की टिकट से मोगा से चुनाव लड़ना चाहते थे .

अख़बारों में छपीं इन रिपोर्ट्स ने सनसनी फैला दी है.

इस से पहले 2009 में भी अदालती भ्रष्टाचार के बारे में ख़बरें लगीं थीं .

इस सनसनीखेज मामले में रिपोर्ट्स प्रकाशित हुई थीं कि पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के

तीन जजों समेत निचली अदालतों के एक जज पर पंजाब पुलिस का विजिलेंस ब्यूरो उंगलियां उठा रहा है।

एक साल पहले विजिलेंस ब्यूरो ने अपनी रिपोर्ट न्यायपालिका को सौंप दी थी, लेकिन अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया है।

कांग्रेसी वरकरों पर दर्ज झूठे पर्चों की जांच करने वाले रिटायर्ड जस्टिस

17 अप्रैल 2008 को शक के आधार पर पंजाब पुलिस के विजिलेंस ब्यूरो ने दो लोगों के फोन टेप करने शुरू किए।

इन दोनों पर शक था कि ये राज्य की सुरक्षा के लिए खतरा हैं और संगठित अपराध में शामिल हैं।

जैसे ही फोन टेप होने शुरू हुए, पंजाब पुलिस के अधिकारियों के होश उड़ गए। दोनों के फोन पर कई लोगों से बातचीत हुई, जिनमें निचली अदालत के जज भी शामिल थे।

यही नहीं, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के दो जजों के बारे में भी बातचीत हुई। बातचीत ना सिर्फ जजों के तबादले, तरक्की बल्कि रिश्वत के लेन-देन तक पहुंची।

ख़बरों में ये भी कहा गया था कि मामला जजों से जुड़ा था लिहाजा पुलिस अधिकारियों को समझ नहीं आ रहा था कि किया क्या जाए।

आखिरकार विजिलेंस ब्यूरो ने ये रिपोर्ट पंजाब के एडवोकेट जनरल एच.एस. मट्टेवाल कोसौंप दी।

 मट्टेवाल ने अगले ही दिन वो रिपोर्ट तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश विजेंद्र जैन को सौंप दी।
इसके बाद एक-एक कर छह रिपोर्ट्स एडवोकेट जनरल मट्टेवाल के जरिए जस्टिस विजेंद्र जैन तक पहुंचीं।
मामला जजों से जुड़ा था
 लिहाजा जस्टिस विजेंद्र जैन ने ये रिपोर्ट देश के मुख्य न्यायाधीश तक पहुंचा दी
इनमें एक नाम हाईकोर्ट के जज महताब सिंह गिल का था।

जैन ने गिल के तबादले की सिफारिश भी कर दी

 पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के जज महताब सिंह गिल पहले भी विवादों में रहे हैं।
2002 में पंजाब पब्लिक सर्विस कमिशन घोटाले में भी उन पर आरोप लगे थे।
इस घोटाले की जांच के बाद पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस बी.एन. सहारिया ने प्रशासनिक कार्यों में दखल देने का आरोप लगाया था।
लेकिन क्यूंकि पंजाब विजिलेंस ब्यूरो के हाथ बंधे हुए थे
इस लिए  रिपोर्ट पर न्यायपालिका से किसी तरह का निर्देश नहीं मिला  लिहाजा उसकी जांच आगे नहीं बढ़ी थी ।
इन ख़बरों के मद्देनज़र भारत के लोगों की माननीय सुप्रीम कोर्ट से मांग है
कि इस मामले का संज्ञान लेते हुए इन आरोपों की जांच वैज्ञानिक तरीकों से किये जाने के लिए निर्देश दिए जाएँ .

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